बंगाल में संगीत और लोक मेला की धूम, म्यूजिक वर्कशॉप में बिखेरा संगीत का सुर

कोलकाता। क्रिसमस (West Bengal Christmas Festival) के बाद से बंगाल में संस्कृति उत्सवों को धूम मची हुई है. एक ओर राज्य सरकार लोक शिल्पी और कलाकारों को प्रोत्साहन के लिए तथा बंगाल की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए लगातार काम कर रही है. अन्य सालों की तरह इस साल भी राज्य सरकार की तरफ से बांग्ला संस्कृति मेला और विश्वबांग्ला लोक संस्कृति उत्सव 2021 का आयोजन किया जा रहा है. दूसरी ओर, हावड़ा में संतूर के प्रसिद्ध कलाकार पंडित तरुण भट्टाचार्य (Pandit Tarun Bhattacharya) ने हावड़ा में खुद जिनिया भट्टाचार्य द्वारा प्रस्तुत जिनिया कैफे (Jinia’s Cafe) में युवा संगीत प्रतिभाओं के साथ एक अनूठी कार्यशाला आयोजन खुले गार्डन किया गया. इस अवसर पर पंडित तरुण भट्टाचार्य ने संतूर के छात्रों को इस कार्यशाला के माध्यम से विभिन्न रागों की पेचीदगियों को सिखाया.

उनके छात्रों में अन्य के अलावा आयुष, मयूख और अभिनव और अनुषा (जो बांसुरी बजाती थीं) शामिल थीं. तरुण भट्टाचार्य को प्रसिद्ध तबला वादक ज्योतिर्मय रॉयचौधरी और विश्वरूप घोष ने संगत किया. इस अवसर पर नामी संतूर वादक तापस सेनगुप्ता भी छात्रों का उत्साहवर्धन किया. इस अवसर पर पंडित तरुण भट्टाचार्य ने छात्रों के साथ संगीत से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा कीं.

छात्रों के साथ शास्त्रीय संगीत और राग पर हुई चर्चा

कार्यशाला के बारे में पंडित तरुण भट्टाचार्य कहा, “मैं हमेशा अपने गुरुजी, भारत रत्न रविशंकर के नक्शेकदम पर चलने की कोशिश करता हूं, जिन्होंने हमारे संगीत समारोह के दौरान बनारस, दिल्ली और यूरोप और अमेरिका के कई अन्य शहरों के खुले वातावरण में हमें संगीत सिखाया. उनका हमेशा से मानना ​​था कि अच्छे संगीत के लिए संगीतकारों को भी खाने का शौक होना चाहिए और अच्छे भोजन के पारखी होने के नाते उन्होंने हमें विभिन्न व्यंजनों से परिचित कराया था. आज मेरे संतूर आश्रम के छात्रों के साथ एक संगीतमय पिकनिक मनाया गया. हमने जिनिया कैफे में शानदार भोजन का स्वाद लिया और साथ ही संगीत, रागों और शास्त्रीय संगीत बजाने की शैली के साथ-साथ प्रतिभा मूल्यांकन, राग और ताल पर चर्चा की.”

उन्होंने कहा,” यह मेरे गुरुजी की विरासत को आगे बढ़ाने के साथ-साथ भावी पीढ़ी में भारतीय संगीत और खाद्य संस्कृति की सुंदरता को आत्मसात करने का मेरा तरीका है. मैं निकट भविष्य में युवा प्रतिभाओं के साथ इस तरह की कई कार्यशालाएं आयोजित करूंगा.” दूसरी ओर, पश्चिम बंगाल के सूचना व संस्कृति विभाग द्वारा बांग्ला संस्कृति मेला और विश्व बांग्ला लोक संस्कृति उत्सव 2021 का आयोजन 25 दिसंबर से 1 जनवरी तक किया जा रहा है. रवींद्र सदन के अलावा कोलकाता के 11 अलग-अलग मचों पर ये आयोजन होंगे जहां कलाकार अपनी प्रतिभा का हुनर सबके सामने पेश कर सकेंगे. शाम 5 बजे से सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे. 5 हजार से अधिक संगीत कलाकार व अन्य कलाकार इन कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे. विभिन्न संगीत प्रतियोगिता व कार्यशालाओं में नये कलाकारों को अपनी प्रतिभा को सामने लाने का भी मौका दिया जायेगा.

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