दुर्गा की आराधना पर इंद्र का कोप, आंधी तूफान के साए में पूजा को लेकर चिंता में आयोजक

दुर्गा की आराधना पर इंद्र का कोप, आंधी तूफान के साए में पूजा को लेकर चिंता में आयोजक

 

कोलकाता, 29 सितंबर । पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता समेत राज्य के अन्य हिस्सों में पिछले 20 दिनों से लगातार हो रही भारी बारिश और अब चक्रवात ने पूजा आयोजकों को भारी चिंता में डाल दिया है। तेज आंधी तूफान के साथ भारी बारिश की वजह से राज्य के अधिकतर इलाके पहले से ही जलमग्न हैं और बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं। ऊपर से कोरोनावायरस का कहर पहले से ही है।  सितंबर महीने का आखिरी चल ही रहा है और 10 अक्टूबर से मां दुर्गा की आराधना शुरू हो जाएगी। ऐसे में बड़े-बड़े पूजा आयोजक जिनके पंडाल काफी बड़े होते हैं, जिन्हें बनाने में कम से कम महीनों का वक्त लगता है वे चिंता में पड़े हुए हैं।

कुम्हारटोली लोक दुर्गोत्सव के संयोजक देबाशीष भट्टाचार्य ने हिन्दुस्थान समाचार से कहा, ”इस साल कोरोना के कारण काम शुरू होने में काफी देर हो चुका है।  नियमानुसार खुला मंडप होगा।  उनमें यह बारिश बाधक बन गई है।  मुझे समझ नहीं आ रहा है कि काम कैसे खत्म होगा।”

 

फोरम फॉर दुर्गोत्सव की अध्यक्ष और दक्षिण कोलकाता में प्रसिद्ध पूजा बोसपुकुर शीतलमंदिर की सचिव काजल सरकार ने कहा, “काम में कोई समस्या नहीं है।  हम पहले से तैयार थे।  अगर आउटडोर काम के दौरान बारिश होती है तो मुझे काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा।”

 

महासचिव सुदीप्त बसु ने कहा, “यह हमारी 63वीं पूजा है।  इस प्रतिकूल मौसम ने हमारे दैनिक जीवन को और अधिक दयनीय बना दिया है।  आज लोग कोरोना से लड़ते-लड़ते थक चुके हैं।  उस पर बारिश हो रही है।  लोग आज पूजा से पहले ठीक से काम नहीं कर पा रहे हैं।  बुखार-जुकाम-खांसी के स ताजा डेंगू का प्रकोप भी बढ़ गया है।  मानव पीड़ा का कोई अंत नहीं है।”

 

चक्रबेरिया पब्लिक दुर्गोत्सव के महासचिव गोरा रॉयचौधरी ने कहा, ‘हमारी पूजा इस साल 65 साल का हो रही है।  2019 में बजट 23 लाख रुपये था।  पिछली बार कोरोना के लिए इसे घटाकर छह लाख रुपये कर दिया गया था।  इस बार 16 लाख है,  लेकिन स्थिति बहुत कठिन है।”

 

नलिनी सरकार स्ट्रीट पब्लिक दुर्गोत्सव के कोषाध्यक्ष सोमक साहा ने कहा, “अन्य समितियों की तरह, हमें खराब मौसम के कारण मंडप बनाने में बहुत परेशानी हो रही है।  हमारीआगे समस्या यह है कि हममें से कुछ लोग  खुले आसमान के नीचे काम कर रहे हैं।  इसके अलावा, उपकरण भीग रहे हैं और पानी में खराब हो रहे हैं, मूर्ति का रंग सूखने में देर हो रही है।  किसी को भी आश्वस्त नहीं किया जा सकता है कि हम सही समय पर मंडप का निर्माण कर पाएंगे।”

 

कोलकाता के एक और प्रसिद्ध आयौजक समाजवादी संघ, इस साल 75 साल में पूजा कर रहे हैं।  संगठन के महासचिव अरिजीत मैत्रा ने कहा,

“हमने अगस्त के अंत में काम शुरू किया।  हाथ में बहुत कम समय था क्योंकि इस बार दुर्गा पूजा कोरोना के माहौल में कई प्रतिकूलताओं के साथ हो रही है।  इस विपत्तिपूर्ण मौसम में   मुझे नहीं पता कि काम खत्म होगा या नहीं।  मंडप खत्म करने के लिए आपको दिन-रात मेहनत करनी पड़ती है।  सोचा, इस बार इतने कम समय और कम बजट में बारिश से पंडाल क्षतिग्रस्त हुआ तो खर्चा बढ़ जाएगा। जो लोग काम कर रहे हैं उन्हें ओवरटाइम देना होगा।  कुल मिलाकर अब हमारी रात की नींद खत्म हो गई है।”

 

दक्षिण कोलकाता के प्रसिद्ध पूजा संतोषपुर ट्रायंगल पार्क दुर्गोत्सव समिति का यह 72वां वर्ष है।  संगठन के अध्यक्ष पार्थ प्रतिम रॉय (बुला) ने कहा, “कोलकाता के सभी क्लबों की तरह, लॉकडाउन और भीड़भाड़ के कारण इस बार पूजा के लिए सामान्य तैयारी शुरू करने में बहुत देर हो चुकी है।  हमने अनिश्चितता के साथ शुरुआत की।  कुम्हारटोली में मूर्तियां बनाने का काम भी काफी देर से शुरू हुआ है। सामान्य कारणों से, मेरे पास पूजा की तैयारी, मंडप बनाने सहित सभी कार्यों के लिए कम से कम 40 दिन का समय था।  हालांकि पुराने मंडप को इतने कम समय में बनाया जा सकता है, लेकिन थीम वाले मंडप का निर्माण एक बहुत ही मुश्किल काम है।

 

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