एमपी के ब्लैक मिलेनियर कांग्रेस विधायक ने निलय डागा का क्या है कोलकाता कनेक्शन, महानगर में क्यों फैला है फर्जी कंपनियों का जाल?

 

औपनिवेशिक काल में देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ रहे पश्चिम बंगाल और राजधानी कोलकाता का कनेक्शन आजकल काला धन का कारोबार करने वाले हर एक ब्लैक मनी मिलेनियर से रहने लगा है। एक दिन पहले ही आयकर विभाग ने मध्य प्रदेश के कांग्रेस विधायक निलय डागा के ठिकानों पर मैराथन छापेमारी की जहां से आठ हजार करोड़ रुपये से अधिक की नगदी और 44 लाख से अधिक मूल्य की कई देशों की मुद्रा बरामद की गई है। इसके साथ ही कांग्रेस विधायक के पास से जिन कंपनियों के शेयर बरामद हुए हैं उनका गैरकानूनी ठिकाना कहीं और नहीं बल्कि राजधानी कोलकाता में ही है। वह भी कोलकाता की ऐतिहासिक “मर्केंटाइल बिल्डिंग” में। यह बिल्डिंग अंग्रेजी हुकुमत के समय से ही सुर्खियों में रही है। 1918 में जब हावड़ा ब्रिज का निर्माण कार्य हो रहा था उसी समय इस ऐतिहासिक बिल्डिंग का निर्माण भी अंग्रेजों ने कराया था और इसमें इंग्लैंड से आयातित होने वाली लोहे की बीम को रखा जाता था। अंग्रेज चले गए, देश को आजादी मिली और वक्त के साथ यह बिल्डिंग गोरे अंग्रेजों के चंगुल से निकलकर काला धन रखने वालों का फर्जी ठिकाना बनती चली गई। लाल बाजार में मौजूद कोलकाता पुलिस मुख्यालय के ठीक पास स्थित मर्केंटाइल बिल्डिंग में ही नीलय डागा की उन कंपनियों के ठिकाने दर्ज किए गए हैं जिनके 259 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे गए थे। दरअसल मध्यप्रदेश के बेतूल में सोया उत्पाद निर्माण समूह ने अपना एक ठिकाना कोलकाता की इस मर्केंटाइल बिल्डिंग में दिखाया है। इसी कंपनी के शेयर को मध्य प्रदेश के कांग्रेस विधायक ने खरीदा था। हालांकि आयकर विभाग ने जब इसकी जांच शुरू की तो पता चला कि कंपनी का यह फर्जी ठिकाना है और उक्त बिल्डिंग में ऐसी कोई कंपनी नहीं चलती है। यानी यह कंपनी केवल कागज कलम पर अस्तित्व में थी और कोलकाता की इस मर्केंटाइल बिल्डिंग के पते पर पंजीकृत की गई थी।

24 हजार से अधिक फर्जी कंपनियों का सुरक्षित पनाहगाह है बंगाल
– केंद्रीय वित्त व उद्योग मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़े के मुताबिक पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता और अन्य क्षेत्रों में पिछले तीन सालों के दौरान 24000 से अधिक फर्जी कंपनियों का पता चला है। सारदा, रोजवैली जैसी चिटफंड कंपनियों के साथ-साथ पश्चिम बंगाल के विभिन्न शहरों के पत्ते पर कागज कलम पर अस्तित्व रखने वाली ऐसी हजारों सेल कंपनियों की भरमार है जिनका जमीनी तौर पर कोई अस्तित्व नहीं है। इन कंपनियों का इस्तेमाल काली कमाई करने वाले भ्रष्ट कारोबारी करते रहे हैं। मनी लॉन्ड्रिंग के साथ-साथ हवाला कारोबार और अन्य फर्जी कारोबार के लिए कोलकाता मुख्य ठिकाना बन कर उभरा है। इसकी वजह यह है कि प्रमुख व्यवसायिक स्थल होने के साथ-साथ यह देश के पूर्वोत्तर, उत्तर और अन्य शहरों को जोड़ने का मुख्य मार्ग है। अर्थशास्त्री और वित्त विशेषज्ञों का कहना है कि कोलकाता और अन्य शहरों में चिटफंड से संबंधित काम करने वाले पेशेवर जानकारों की संख्या काफी है जो सस्ती कीमत पर उपलब्ध होते हैं और सेल कंपनियां गढ़ने में माहिर हैं।
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नोटबंदी के समय भी सेल कंपनियों की जमाबंदी के लिए सुर्खियों में था कोलकाता
– जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी की थी तब भी इन फर्जी कंपनियों के नाम से करोड़ों रुपये की जमाबंदी बढ़ने लगी थी जिससे केंद्र सरकार को यह समझते देर नहीं लगी थी कि काले धन के असली मालिकों को बचाने के लिए फर्जी कंपनियों के सहारे ब्लैक मनी को व्हाइट किया जा रहा है। इसलिए सरकार ने तत्काल टास्क फोर्स का गठन किया था और करीब दो लाख से अधिक ऐसी फर्जी कंपनियों को चिन्हित कर बंद किया गया था। इनमें से अधिकतर का ठिकाना कोलकाता के ही पते पर पंजीकृत था। इसके अलावा देशभर में फैले चिटफंड के कारोबार की कंपनियों के मूल ठिकाने भी अमूमन कोलकाता में ही रहते हैं।

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