अब बिना जांच पड़ताल तृणमूल नेताओं को शामिल नहीं करेगी भाजपा

लोक संवाददाता, कोलकाता, 02 फरवरी। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले बड़े पैमाने पर तृणमूल कांग्रेस नेताओं को शामिल कराने की वजह से सवालों के घेरे में आई भारतीय जनता पार्टी ने अब इस प्रक्रिया को रोकने का निर्णय लिया है। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और बंगाल प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने कहा है कि बड़े पैमाने पर तृणमूल कांग्रेस के नेताओं के शामिल कराए जाने की वजह से भारतीय जनता पार्टी पर तृणमूल की “बी टीम” बनने के आरोप लगने लगे हैं।

इसके अलावा कई ऐसे तृणमूल नेता भी भाजपा में शामिल हो रहे हैं जो सत्तारूढ़ पार्टी से जुड़े रहने के दौरान कई सारे अनैतिक कार्यों में शामिल रहे हैं। इसकी वजह से स्थानीय भाजपा नेतृत्व का विरोध भी पार्टी को झेलना पड़ रहा है। इसलिए सावधानी बरतते हुए अब केवल चयनात्मक प्रणाली के जरिए ही तृणमूल नेताओं को शामिल कराने का निर्णय लिया गया है।

उन्होंने बताया कि तृणमूल कांग्रेस का अगर कोई भी नेता भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने की इच्छा जताता है तो उसका पोलिटिकल कैरियर, उसके राजनीति के तरीके और उसकी साफ सुथरी छवि को जांचा परखा जाएगा। इसके लिए स्थानीय भाजपा नेतृत्व के साथ समन्वय बनाकर ही काम होगा। उन्होंने कहा कि तृणमूल नेताओं की जो सामूहिक जॉइनिंग हो रही थी अब उस पर रोक रहेगी।

पार्टी के एक अन्य वरिष्ठ नेता ने नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर बताया कि ममता बनर्जी की पार्टी से कई ऐसे नेता आ गए हैं जो भ्रष्ट छवि के रहे हैं और उनके आने से पार्टी का पुराना स्थानीय नेतृत्व नाराज चल रहा है। बंगाल में माहौल भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में होने की वजह से बड़ी संख्या में तृणमूल कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता भाजपा की सदस्यता ले रहे हैं जिसकी वजह से भारतीय जनता पार्टी के परंपरागत मतदाताओं और समर्थकों में नाराजगी बढ़ रही है। अगर ऐसा ही चलता रहा तो इससे विधानसभा चुनाव में पार्टी को नुकसान उठाना पड़ सकता है।

कई मामलों में ऐसा हुआ है कि जिला भाजपा इकाई से संपर्क साधे बगैर वहां के तृणमूल नेताओं को पार्टी में शामिल करा लिया गया है। इससे जिला नेतृत्व के साथ पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की अनबन हो रही है और यह चुनाव के समय पार्टी को नुकसान पहुंचाएगा। इसलिए अब निर्णय लिया गया है कि सामूहिक जॉइनिंग नहीं होगी। अब केवल सिलेक्टिव जॉइनिंग ही होगी, वह भी स्थानीय भाजपा नेताओं की सलाह मशविरा और स्क्रूटनी के बाद।

उल्लेखनीय है है कि 294 विधानसभा सीटों वाले पश्चिम बंगाल में मार्च-अप्रैल के बीच चुनाव होने हैं।

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