जय श्री राम का नारा भगवान के प्रति श्रद्धा के लिए नहीं ममता को अपमानित करने के लिए लगाया गया : अधीर रंजन

लोक डेस्क, कोलकाता, 24 जनवरी। पश्चिम बंगाल की राजनीति में ममता बनर्जी के धुर विरोधी के रूप में जाने जाने वाले प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी जय श्रीराम के नारेबाजी के मुद्दे पर ममता के समर्थन में उतर गए हैं। उन्होंने कहा है, “जय श्री राम का नारा भगवान राम के प्रति श्रद्धा दिखाने के लिए नहीं बल्कि वास्तविकता में ममता बनर्जी को अपमानित करने के लिए लगाया गया था और इसकी मैं घोर निंदा करता हूं।”

शनिवार को विक्टोरिया मेमोरियल में आयोजित पराक्रम दिवस कार्यक्रम में ममता बनर्जी के संबोधन के लिए नाम पुकारे जाने के बाद दर्शक दीर्घा में बैठे कुछ लोगों ने जय श्रीराम के नारे लगाए थे जिसके बाद नाराज ममता ने संबोधन से इनकार कर दिया था। उन्होंने केंद्र पर बुलाकर अपमानित करने का आरोप लगाया था। इसे लेकर चौधरी ने मीडिया से बात की है उन्होंने। कहा है कि प्रधानमंत्री का पद हो या मुख्यमंत्री का, संवैधानिक पदों का सम्मान किया जाना जरूरी है।
अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि ममता बनर्जी के साथ हमारा राजनीतिक मतभेद जरूर है लेकिन वह पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री हैं और आधिकारिक समारोह में उनका अपमान किया गया है। यह स्वीकार्य नहीं है।
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आखिर अधीर ने क्यों किया ममता का समर्थन
– इस मामले पर अधीर रंजन चौधरी द्वारा ममता बनर्जी का समर्थन किया जाना बंगाल की राजनीति पर नजर रखने वालों को चकित करने वाला है। अधीर मुर्शिदाबाद के बरहमपुर से छठी बार सांसद बने हैं और जो उनकी राजनीति को जानते हैं वे इस बात को भलीभांति जानते हैं कि वह ममता बनर्जी के धुर विरोधी हैं। ऐसे में जय श्रीराम के नारे को लेकर उन्होंने ममता बनर्जी का समर्थन क्यों किया है? वह भी तब जबकि बंगाल में चुनाव हैं और इस मामले में जो भी ममता के साथ खड़े होंगे उनके खिलाफ बहुसंख्यक वोट बैंक के जाने के आसार हैं। अंदाजा लगाया जा रहा है कि तमिलनाडु के बाद राहुल गांधी जल्द ही बंगाल आने वाले हैं। यहां उन क्षेत्रों का दौरा करेंगे जिनमें लोकसभा चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी को जीत मिली है। इसके अलावा राष्ट्रीय राजनीति में ममता बनर्जी के संबंध कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्षा सोनिया गांधी से मधुर हैं। बंगाल में तीसरे मोर्चे के विकल्प के लिए माकपा और कांग्रेस एक दूसरे से बात जरूर कर रहे हैं लेकिन सीटों पर सहमति नहीं बन पाने की वजह से गठबंधन नहीं हो पा रहा है। ऐसे में तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ अगर कांग्रेस के सुर नरम रहते हैं तो राहुल गांधी के दौरे के दौरान अघोषित तौर पर ही सही, लेकिन कुछ क्षेत्रों में कांग्रेस को तृणमूल की और तृणमूल को कांग्रेस की मदद विधानसभा चुनाव के दौरान मिल सकती है।

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