अल्पसंख्यक तुष्टीकरण के लिए ममता ने किया जय श्रीराम का विरोध : कैलाश विजयवर्गीय

लोक डेस्क, कोलकाता, 24 जनवरी। भारतीय जनता पार्टी की पश्चिम बंगाल इकाई के प्रभारी और राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने ममता बनर्जी द्वारा पराक्रम दिवस कार्यक्रम में “जय श्री राम” नारे का विरोध किए जाने को लेकर रविवार को पलटवार किया है। उन्होंने कहा है कि पश्चिम बंगाल के अल्पसंख्यक मतदाताओं को खुश करने के लिए ही इतने बड़े सार्वजनिक मंच से ममता बनर्जी ने जय श्री राम का विरोध किया। उन्होंने कहा कि नेताजी के कार्यक्रम को पूरी दुनिया के लोग देख रहे थे, यह भूल कर ममता ने केवल तुच्छ राजनीतिक मानसिकता में ऐसा बर्ताव किया है जिससे गलत संदेश गया है।

उन्होंने कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस से संबंधित मंच का इस्तेमाल भी ममता बनर्जी ने ‘राजनीति से प्रेरित’ होकर किया है। ममता जी ने 30 फीसदी मतदाताओं को खुश करने के लिए ऐसा किया। कैलाश विजयवर्गीय ने सिलीगुड़ी में पार्टी संगठन को लेकर बैठक कीं।

उसके पहले न्यू जलपाईगुड़ी स्टेशन पर संवाददाताओं से बातचीत करते हुए कैलाश विजयवर्गीय ने कहा, “इस राज्य में 70 प्रतिशत मतदाता हमेशा से उपेक्षित रहे हैं। इसलिए इस सरकार को बदलने की जरूरत है।”

कैलाश विजयवर्गीय ने कहा, ” नेताजी पूरे देश और पूरी दुनिया का गर्व हैं। उनके साथ समारोह की महिमा है। यहां राजनीतिकरण ठीक नहीं है। यह वास्तव में दुर्भाग्यपूर्ण है। इस तरह की घटनाएं नेताजी का अपमान हैं।
” कैलाश विजयवर्गीय ने किया, ” जय श्री राम की नारेबाजी में कुछ ऐसा क्या है जो उनका अपमान हुआ है? भारत माता का जय बोलने पर उनका क्यों अपमान होता है?” प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी या संस्कृति मंत्री प्रह्लाद पटेल के स्वागत के लिए जय श्रीराम के नारे लगाए गए थे। ममता बनर्जी के मामले में भी ऐसा ही हुआ है। यह उनका राजनीतिक एजेंडा है। आप सब कुछ समझकर समझ गए हैं। उन्होंने राज्य के 30 प्रतिशत मतदाताओं को खुश करने के लिए ऐसा किया। “

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